Of dignity geeta/गरिमा गीता की - दो शब्द
Pege-6
श्री कृष्ण जी में प्रवेश करके बोला था। भगवान श्री कृष्ण रूप में स्वयं श्री विष्णु जी ही अवतार धारकर आए थे।
एक समय ऋषि भृगु ऋषि ने आराम से बैठे भगवान श्री विष्णु जी (श्री कृष्ण जी) के सीने में लाट घात किया। श्री विष्णु जी ने श्री भृगु ऋषि जी के पैर को सहलाते हुए कहा कि 'हे ऋषिवर! आपके कोमल पैर को कहीं चोट तो नहीं आई, क्योंकि मेरा सीना तो कठोर पत्थर जैसा है।' यदि श्री विष्णु जी (श्री कृष्ण जी) युद्ध प्रिय होते तो सुदर्शन चक्र से श्री भृगु जी के इतने टुकड़े कर सकते थे की गिनती न होती।
वास्तविकता यह है कि काल भगवान जो 21 ब्रह्मांड का प्रभु है, उसने प्रतिज्ञा की है कि मैं स्थूल शरीर में व्यक्त (मानव सदृश्य अपने वास्तविक) रूप में सबके सामने नहीं आऊॅंगा। उसी ने सूक्ष्म शरीर बनाकर प्रेत की तरह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके पवित्र गीता जी का ज्ञान तो सही (वेदों का सार ) कहा, परंतु युद्ध करवाने के लिए भी अटकल बाजी में कसर नहीं छोड़ी। काल (ब्रह्म) कौन है? यह जानने के लिए कृपया पढ़िए सृष्टि रचना इसी पुस्तक के प्रश्न नंबर 300 पर।
अन्य प्रमाण :- "गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं कहा" :-
💠 जब तक महाभारत का युद्ध समाप्त नहीं हुआ तब तक ज्योति निरंजन ( काल- ब्रह्म -क्षर पुरुष) श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश रहा तथा युधिष्ठिर जी से झूठ बुलवाया की कह दो कि अश्वत्थामा मर Ashwatthama die , श्री बबरु भान (खाटू श्याम जी) का शीश कटवाया तथा रथ के पहिए को हथियार रूप में उठाया, यह सर्वकाल ही का किया -कराया उपद्रव था, प्रभु श्री कृष्ण जी का नहीं। महाभारत का युद्ध समाप्त होते ही काल भगवान श्री कृष्ण जी के शरीर से निकल गया। श्री कृष्ण जी ने श्री युधिष्ठिर जी को इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) की राजगद्दी पर बैठा कर द्वारिका जाने को कहा। तब अर्जुन आदि ने प्रार्थना की कि हे श्री कृष्ण जी! आप हमारे पूज्य गुरुदेव Pujya Gurudev हो, हमें एक सत्संग सुना कर जाना, ताकि हम आपके सदा वचनों पर चलकर अपना आत्म -कल्याण कर सकें।
यह प्रार्थना स्वीकार करके श्री कृष्ण जी ने तिथि, समय तथा स्थान निहित कर दिया। निश्चित तिथि को श्री अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण जी से कहा कि प्रभु आज वही पवित्र गीता जी का ज्ञान ज्यों का त्यों सुनाना, Lord Today, the same knowledge of the holy Gita is being recited as it is, क्योंकि मैं बुद्धि के दोष से भूल गया हूॅं। तब श्री कृष्ण जी ने कहा कि हे अर्जुन तू निश्चय ही बड़ा श्रद्धा हीन है। तेरी बुद्धि अच्छी नहीं है। ऐसे पवित्र ज्ञान को तू क्यों भूल गया? फिर स्वयं कहा कि अब उस पूरे गीता ज्ञान को मैं नहीं कह सकता अर्थात् मुझे ज्ञान नहीं । Now I cannot say that entire Gita knowledge, that is, I do not have knowledge. कहा कि उस समय तो मैंने योग युक्त होकर बोला था। विचारणीय विषय है कि यदि भगवान श्री कृष्ण जी युद्ध के समय योग युक्त हुए होते तो Had yoga शांति समय में योग युक्त होना कठिन नहीं था। जबकि श्री व्यास जी Vyas Ji ने वही पवित्र गीता जी का ज्ञान बर्षो उपरान्त After years ज्यों का त्यों लिपिबद्ध written कर दिया। उस समय वह ब्रह्म (काल- ज्योति निरंजन) ने श्री व्यास जी के शरीर में प्रवेश Access कर के पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी को लिपिबद्ध कराया, जो वर्तमान में आपके कर कमलों में है।
प्रमाण के लिए संक्षिप्त महाभारत भाग -2 के पृष्ठ 667 तथा पुराने के पृष्ठ नंबर 1531 पर :-
न शक्यं तन्मया भूयस्तथा वक्तुमशेषत: ।। परं हि ब्रह्म कथितं योगयुक्तेन तन्मया ।
( महाभारत,आश्रव: 1612-13)......
अधिक जानकारी के लिए जीने की राह पुस्तक पढ़ें
For more information, read the book jine ki raah
Download ke liye photo👆 per click Karen
(नाम दान केंद्र) या अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें । (name donation center) or contact for more information.
📞☎️8222880541 , 8222880542, 8222880543, 8222880544 , 8222880545
क्रमशः_______________
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। संत रामपाल जी महाराज YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry
आगे की पोस्ट का नोटिफिकेशन पाने के लिए सब्सक्राइब करें👇👇
और follow करना ना भूलें
SUBSCRIBE TO GET NOTIFICATIONS FOR FURTHER POSTS
And don't forget to follow
आगे पढ़े--------(गरिमा गीता की) दो शब्द page-7




0 टिप्पणियाँ