1. भुमिका-A-E
2. दो शब्द-1
3. पवित्र गीता जी का ज्ञान किसने कहा?-1
4. विराट रूप क्या है?-4
5. संक्षिप्त महाभारत का लेख-6
6. काल की परिभाषा-10
7. अन अधिकारी से यज्ञ व पाठ करवाना व्यर्थ है-13
8. गीता में दो प्रकार का ज्ञान हैं-14
पहला अध्याय
1. दिव्य सारांश-16
दुसरा अध्याय
1. दिव्य सारांश-17
2. गीता ज्ञान बोलने वाले के भी जन्म-मृत्यु होते हैं-17
3. अविनाशी प्रभू तो गीता ज्ञान दाता से अन्य है-18
4. नकली संत की कथा-22
5. पूर्ण परमात्मा की शाधना करने तथा समर्थता का सटिक वर्णन-24
6. शब्द-"सतलोक में चल मेरी सुरता"-27
7. वेदों में वर्णित शाधना विधि से विकार नहीं मरते-34
8. ब्रह्मा से मन व काम ( सैक्स ) वश नहीं हुआ-36
तीसरा अध्याय
1. दिव्य सारांश-38
2. शास्त्र विधि रहित पुजा अर्थात् मनमाना आचरण का विवरण-38
3. यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं, मुक्ति नहीं-39
4. जो धर्म नहीं करते वे चोर व पापी प्राणी है-43
5. काल ब्रह्म का उत्पत्तिकर्ता तथा यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा है-44
6. मनोकामना पूर्ति के बिना किया हुआ धर्म पुर्ण लाभदायक-48
7. कथनी और करनी में अंतर-48
8. विद्वानों को शास्त्र अनुसार साधना करनी चाहिए-49
9. दूसरों की दिखावटी घटिया साधना से अपनी शास्त्र विधि अनुसार साधना अच्छी-52
10. एक दुखी परिवार की कहानी-52
11. मान बढई जान की दुश्मन-53
-: नकली नामों से मुक्ति नहीं:-
1. सतनाम के प्रमाण के लिए कबीरपंथी शब्दावली से सहाभार-56
2. धर्मदास को सतनाम कबीर साहेब ने दिया-56
3. सतनाम का गरीब दास जी महाराज की वाणी में प्रमाण-56
4. श्री नानक साहेब की वाणी में सतनाम का प्रमाण-57
5. शब्द : "संतों शब्दै शब्द बखाना"-62
6. सार शब्द बिना सतनाम भी व्यर्थ-63
7. नामदेव जी की वाणी में सतनाम का प्रमाण-64
8. गलत नाम मूर्खों की उपासना-65
9. काल के जाल का वर्णन-65
10. शब्द : "कर नैनो दीदार महल में प्यारा है"-66
11. नकली गुरु को त्याग देना पाप नहीं-71
12. सतनाम का विशेष प्रमाण-72
13. अवधू अविगत से चल आए-73
14. शब्द : "ऐॆसा राम कबीर ने जाना-82
15. संसार रूप वृक्ष के मूल, तना, डार, साखा तथा पत्तों का वर्णन-83
16. गीता में भी संसार वृक्ष का वर्णन-83
-: सत मार्ग दर्शन :-
1. रमैनी : "मैं तोहे पूॅंछू पंडित ज्ञानी"-85
2. रमैनी : "वेद कते झूठे नहीं भाई"-86
3. (कबीर साहेब द्वारा अंधविश्वास का निवारण करना चित्र)-87
4. पितरों को जल देना व्यर्थ-88
5. भगवान शंकर के भी मन व काम (सैक्स) बस नहीं हुआ-88
चौथा अध्याय
1. सारांश-94
2. गीता ज्ञान बोलने वाला भी जन्मता- मरता है-94
3. पूर्ण ज्ञानी काल जाल में नहीं रहते-96
4. कर्मों के बंधन से त्रिलोकीनाथ भी नहीं बचे-96
5. जो जैसी साधना करता है, उसे ही गलती से पाप नाशक जानता है-97
6. नाम के साथ साथ यज्ञ आवश्यक-98
7. तत्वदर्शी संतों से ज्ञान समझकर भक्ति करने से पूर्ण मुक्ति संभव-99
पांचवा अध्याय
1. सारांश-102
2. कर्म सन्यासी से कर्म योगी उत्तम है-103
3. श्रृंगी ऋषि जैसे कर्म सन्यासी भी असफल रहे-105
4. वेदों में वर्णित साधना से विकार रहित नहीं होते-107
5. नारद जी की कहानी-107
6. कर्म सन्यासी को त्याग का अभिमान हो जाता है-110
7. सुखदेव ऋषि की कथा-110
8. आदरणीय गरीब दास साहेब जी की वाणी-114
9. राजा अम्बरीष कर्म योगी तथा दुर्वासा ऋषि कर्म सन्यासी थे-116
10. गीता ज्ञान बोलने वाले से अन्य पूर्ण परमात्मा है-118
11. प्राणी अपने स्वभाव वस चलते हैं-118
-: पंडित की परिभाषा :-
1. साहेब कबीर द्वारा भैंसें से वेद मंत्र बुलवाना-119
2. (चित्र-साहेब कबीर द्वारा भैंसें से वेद मंत्र बुलवाना)-121
3. वार कौन तथा पार कौन?-123
4. शब्द : 'कोई है रे परले पार का'-123
5. अजपा जाप से विकार मरते हैं-125
6. दयालु परमात्मा कौन?-126
छठवां अध्याय
1. सारांश-128
2.हठयोग करके ध्यान करना गीता ज्ञान दाता का मत व्यर्थ है-130
3. ध्यान समाधि का फल-130
4. योगी कौन?-131
5. गीता ज्ञान में विरोधाभास-132
6. पूर्ण परमात्मा प्राप्त करने की विधि व व्रत निषेध की जानकारी-133
7. मन का रोकना वायु रोकने के समान-134
8. साधक की साधना बिगड़ने पर क्या होगा?-135
9. पूरण योगी कौन?-139
सातवां अध्याय
1. दिव्य सारांश-141
2. इस ज्ञान को जानने के बाद कुछ जानना शेष नहीं-141
3. तीनों गुण क्या है? प्रमाण सहित-143
4."देवी दुर्गा का पति है", का प्रमाण-144
5.ब्रह्मा, विष्णु, शिव, (त्रिगुण माया) जीव को मुक्त नहीं होने देते-145
6.गीता ज्ञान देने वाले ने अपनी भक्ति से होने वाली गति को अनुत्तम यानी घटिया क्यों कहा?-146
7.अन्य देवताओं (रजोगुण ब्रह्मा, सतोगुण विष्णु, तमोगुण शिव) की पूजा बुद्धिहीन ही करते हैं-151
8. ज्योति निरंजन (काल) कभी स्थूल शरीर आकार में सर्व के समक्ष नहीं आता-152
9. काल के जाल से कौन छूटते हैं?-154
10. सातवें अध्याय के सर्व श्लोकों का हिंदी अनुवाद-156
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