आठवां अध्याय
1. दिव्य सारांश -160
2. वह तत् ब्रह्म यानि पूर्ण ब्रह्म कौन हैं ?-160
3. काल का उपासक काल ब्रह्म को तथा पूर्ण ब्रह्म का उपासक परम अक्षर ब्रह्म को प्राप्त होता है-160
4. पूर्ण ब्रह्म का साधक उसी को प्राप्त होता है-161
5. ब्रह्म (काल) प्राप्त साधक का सुख क्षणिक है-162
6. महाप्रलय में ब्रह्मांड में बना ब्रह्मलोक भी नष्ट हो जाता है-163
7. प्रलय की जानकारी-163
8. सर्व प्रभुओं की आयु-168
9. परब्रह्म (अक्षर पुरुष) से भी दूसरा सनातन अव्यक्त सत्पुरुष (पूर्ण ब्रह्म) है-170
10. तीन प्रभुओं का प्रमाण -170
11. ब्रह्म (काल) का परमधाम सतलोक-171
12.पूर्ण परमात्मा को अनन्य भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है-171
13. आठवें अध्याय के सर्व श्लोकों का हिंदी अनुवाद-173
नौवां अध्याय
1. दिव्य सारांश-177
2. पूर्ण परमात्मा ही सर्व जीवो का आधार-177
3. ब्रह्म (काल) उपासक का जन्म मरण निश्चित है-178
4. प्रकृति व ब्रह्म (काल) से प्राणियों की उत्पत्ति-178
5. ब्रह्म (काल) कभी स्थूल शरीर में आकर में नहीं आता-179
6. ब्रह्म (काल) के उपासक उसी का आहार-179
7. पवित्र वेदों अनुसार साधना का परिणाम केवल स्वर्ग महास्वर्ग, मुक्ति नहीं-181
8. वेदों के अनुसार साधना न करने वाले पूर्ण मुक्त नहीं-182
9.श्राद्ध निकालने (पितर पूजने) वाले पितर बनेंगे, मुक्ति नहीं-182
10. अति दुराचारी भी भक्ति करने वाला महात्मा के समान-186
दसवां अध्याय
1. सारांश-190
2. ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति का प्रमाण190
3. पूर्ण ज्ञानी पूर्ण परमात्मा की ही पूजा करते हैं ब्रह्म (काल) कि नहीं-191
4.ब्रह्म (काल) द्वारा ही शास्त्र (वेद) उत्पन्न-191
5. ब्रह्म (काल) के उपासक उसी के आधार-191
ग्यारहवां अध्याय
1. सारांश-195
2. अर्जुन द्वारा भगवान काल की वास्तविकता जानने की प्रार्थना-195
3. अर्जुन को भगवान (काल) द्वारा दिव्य दृष्टि प्रदान करना तथा अपना वास्तविक काल रूप दिखाना195
4. संजय द्वारा (काल) रूप का विवरण-195
5. अर्जुन द्वारा काल रूप का आंखों देखा हाल बताना-195
6. अर्जुन पूछता है कि वास्तव में आप कौन हो?-196
7. गीता ज्ञान दाता स्वयं को काल बताता है-196
8. ब्रह्म (काल) भगवान की प्राप्ति अति असंभव-197
9. चतुर्भुज महाविष्णु रूप में भी दर्शन वेदों व तप, दान, यज्ञ आदि से नहीं, केवल अनन्य भक्ति से-197
बारहवां अध्याय
1. सारांश-202
2. सत्यनाम व सारनाम बिना निराकार व साकार रूप में ब्रह्म (काल) उपासक काल के की जाल में रहते हैं-202
तेरहवां अध्याय
1. सारांश-205
2. क्षेत्र व क्षेत्रज्ञ की परिभाषा-205
3. आन उपासना को व्यभिचारिणी भक्ति बताना-205
4. पूर्ण परमात्मा ही जानने व भक्ति योग्य है-206
5. पूर्ण परमात्मा तथा प्रकृति दोनों अनादि-208
6. अन्य अनुवादक कर्ताओं का गोलमाल-209
7. मन मुखी शाधना व्यर्थ-211
8. भक्ति के लिए अक्षर ज्ञान आवश्यक नहीं-211
9. पुरानी ज्ञानी वही है जो पूर्ण परमात्मा को अविनाशी मानता है-211
10. शब्द : "मन तु चल रे सुख के सागर"-213
11. देवी देवताओं का राजा इंद्र भी गधा बनता है-214
12. क्षेत्र (शरीर) क्षेत्रज्ञ (ब्रह्म) तथा क्षेत्री (परमात्मा आत्मा सहित) को जानकर भगत काल जाल से मुक्त हो जाता है-215
चौदहवां अध्याय
1. सारांश-217
2. ब्रह्म (काल) द्वारा अति उत्तम ज्ञान की जानकारी-217
3. परमात्मा के क्या धर्म गुण होते हैं?-218
4. भगवान कृष्ण प्रभु परंतु पूर्ण समर्थ नहीं-218
-: साहेब कबीर पूरण परमात्मा :-
1. मृतक गाय को जीवित करना-218
2. मृतक लड़के कमाल को जीवित करना-222
3.चित्र - (मृतक लड़के कमाल को जीवित करना)-223
4. चित्र - (मृतक लड़की कमाली को जीवित करना-224
5. मृतक लड़की कमाली को जीवित करना-225
6. लड़के सेऊ (शिव) को जीवित करना-225
7. ब्रह्म (काल) व प्रकृति (दुर्गा) से सर्व प्राणी तथा ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति-228
8. तीनों- ब्रह्मा (रजगुण), विष्णु (सतगुण), शिव (तमगुण) आत्मा को शरीर में बांधते हैं अर्थात मुक्त नहीं होने देते-228
9. ब्रह्मा की उपासना से उपलब्धि-228
10. शिव की उपासना से प्राप्ति-229
11. विष्णु की उपासना से प्राप्ति229
12. ब्रह्मा विष्णु शिव कर्ता नहीं-230
13. ब्रह्मा, विष्णु, शिव की साधना त्याग कर पूर्ण परमात्मा की पूजा करनी चाहिए-230
14. तीनों गुणों से अतीत अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, शिव की भक्ति से ऊपर उठे भक्तों के लक्षण-230
15. ब्रह्म (काल) की उपासना का लाभ देवी देवताओं व ब्रह्मा, विष्णु, शिव की भक्ति त्याग कर होता है-231
16. पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति में काल ब्रह्म सहयोगी-231
पंद्रहवां अध्याय
1. सारांश-233
2. सृष्टि रूपी वृक्ष का वर्णन-233
3. (उल्टे लटके हुए सृष्टि रूपी वृक्ष का चित्र)-234
4. पूर्ण परमात्मा की जानकारी-235
5. तीन पुरुषों (प्रभुओं) का वर्णन-237
6. ब्रह्म काल नाशवान है-237
7. वास्तव में अविनाशी पूर्ण परमात्मा-238
8. गीता की एक सास्त्र है-240
9. पन्द्रहवें अध्याय के सर्व श्लोकों का हिंदी अनुवाद-242
आगे पढ़ें----------विष्यानुक्रमणिका-C


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