Of dignity geeta/गरिमा गीता की - विषयानुक्रमणिका - भुमिका-c
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काल ब्रह्म जो उस समय अपने पुत्र शिव के वेश में उपस्थित था, ने बताया कि हे पुत्रों! मेरे पाँच कृत्य हैं सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोभाव तथा अनुग्रह है। हे पुत्रो ब्रह्मा, विष्णु! सृष्टि की उत्पत्ति ब्रह्मा तेरे को तथा पालन करना विष्णु तेरे को मैंने तुम्हारे तप के प्रतिफल में दिए हैं। संहार (सामान्य प्राणियों को मारना) रूद्र को तथा तिरोभाव (भक्तों तथा देवताओं आदि को मारना) महेश को दिए, परंतु "अनुग्रह" कृत्य को पाने में कोई भी समर्थ नहीं है । ( 1-12 )
श्री शिव महापुराण के इस प्रकरण से सिध्द हुआ की श्री ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव जी ईश यानी संसार के स्वामी (प्रभु) नहीं है। इन तीनों का पिता काल ब्रह्म है तथा माता श्री देवी (दुर्गा) जी हैं जो श्री देवी भागवत पुराण यानी देवी पुराण में लिखा है। हिंदू धर्म गुरु जन अपने शास्त्रों से ही परिचित नहीं है तो यह गुरु पद के योग्य नहीं है। इन्होंने हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के मानव जीवन का नाश कर दिया। शास्त्र विधि विरुध्द भक्ति साधना करवाकर भिखारी, चोर, डाकू, रिश्वतखोर, मिलावट खोर बना कर छोड़ दिया। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 -24 में स्पष्ट किया है कि जो साधक शास्त्र विधि त्याग कर अपनी इच्छा से मन माना आचरण करता है यानी जो भक्ति की साधना शास्त्रों में वर्णित नहीं है, उसे करता है तो उसे ने तो सुख प्राप्त होता है,न उसे भक्ति की शक्ति यानी सिद्धि प्राप्त होती है तथा न उसकी गति यानी मुक्ति होती है। इसी कारण से सर्व साधक तन- मन- धन से झूठे गुरुओं द्वारा बताई शास्त्र विरुद्ध साधना, दान- धर्म भी करते हैं। फिर भी तो घर परिवार में सुख, न कारोबार में बरकत (लाभ) जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति भगवान की साधना से अपेक्षा करता है। साधना शास्त्रविरूद्ध होने से परमात्मा की और से कोई लाभ नहीं मिलता। जिसकी पूर्ति के लिए चोरी, हेराफेरी, रिश्वत, ठगी मिलावट अपराध करने लग जाते हैं। कुछ समय पश्चात् नास्तिक हो जाते हैं। ऐसे हिंदू समाज का बेड़ा गरक शास्त्र ज्ञान से अपरिचित हिन्दू गुरुओं ने कर दिया। मेरे (लेखक - रामपाल दास के) पास शास्त्रों का यथार्थ ज्ञान हैं तथा शास्त्रोक्त साधना के यथार्थ स्मरण मंत्र हैं जो साधक को सुख यानि घर - परिवार में सुख , कृषि व कारोबार में बरकत (लाभ ) , आध्यात्मिक शक्ति (सिद्धि) तथा पूर्ण मोक्ष प्रदान करते हैं। इस पुस्तक "गरीमा गीता की " में आप जी को उन शास्त्रों में वर्णित यथार्थ साधना के मंत्रों की जानकारी पढ़ने को मिलेगी ।शास्त्रों के अध्याय, श्लोक तथा पृष्ठ भी लिखे हैं जो आप अपनी संतुष्टि के लिए अपने शास्त्रों से मिलान करके जांच सकते हो।
यदि कोई व्यक्ति (स्त्री -पुरुष) उन मंत्रों को इस पुस्तक में पढ़कर जाप करेगा तो उसे कोई लाभ नहीं होगा। उन मंत्रों को मेरे से या मेरे द्वारा बताई दीक्षा की DVD के माध्यम से दीक्षा लेकर आजीवन मर्यादा में रहकर साधना करने से सर्व लाभ तथा पूर्ण मोक्ष मिलेगा।
श्रीमद्भागवत गीता चारों वेदों (ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद तथा अथर्ववेद) का सारांश है तथा यह पुस्तक "गरिमा गीता की" श्रीमद भगवत गीता का यथार्थ सारांश है। प्रत्येक अध्याय से मक्खन निकालकर फिर उसको शुद्ध करके गीता रुपी गाय का घी बनाया है। आप जी इसे पढ़ें तथा गीता की गरिमा से यथार्थ रूप से परिचित होकर स्वयं तथा अपने परिवार को धन्य बनाऐं मेेरे से दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त करें । विश्व के सर्व प्राणी एक परमेश्वर कबीर जी के बच्चे हैं यानी परमेश्वर द्वारा उत्पन्न आत्माऐं है जो काल ब्रह्म के लोक में जन्म -मरण तथा अनेकों कष्ट उठा रहे हैं। परमेश्वर कबीर जी चाहते हैं कि मेरी आत्माऐं मुझे अध्यात्म ज्ञान से समझे पहचानें। फिर सत्य साधना करके सनातन परमधाम (सतलोक) satlok में जाकर सदा सुखी जीवन-------आगे


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