गरिमा गीता की - दो शब्द page-1 ॥ गीता बोलने वाले काल ब्रह्म ने अपने से अन्य परम अक्षर ब्रह्म परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है। वह परमेश्वर कौन है?



Of dignity geeta/गरिमा गीता की - दो शब्द

Pege-1

गरिमा गीता की 

दो शब्द

          हिंदुओं के शास्त्रों में पवित्र वेद में गीता विशेष है उनके साथ-साथ अठारह पुराणों को भी सामान दृष्टि से देखा जाता है। श्रीमद्भागवत सुधासागर sudhasagar, रामायण ramayan, महाभारत mahabharat भी विशेष प्रमाणित शास्त्रों में से है। विशेष विचारणीय विषय यह है कि जिन पवित्र शास्त्रों को हिंदुओं के शास्त्र कहा जाता है, जैसे पवित्र चारों वेद व पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी आदि, वास्तव में ये सद् शास्त्र केवल पवित्र हिंदू धर्म के ही नहीं है। ये सर्व शास्त्र महर्षि व्यास जी maharishi vyas ji द्वारा उसे समय लिखे गए थे जब कोई अन्य धर्म नहीं था। इसीलिए पवित्र वेद व पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी पुराणदि सर्व शास्त्र मानव मात्र के कल्याण Welfareके लिए हैं ।

             सर्वप्रथम पवित्र शास्त्र श्रीमद् भगवत गीता जी पर विचार करते हैं।

          इस पुस्तक में श्रीमद् भगवत गीता का संपूर्ण  sampurn सारांश है जिसमें प्रत्येक अध्याय का भिन्न-भिन्न विश्लेषण किया गया है। विश्व में एकमात्र गीता का यथार्थ प्रकाश किया गया है। मुझे दास (रामपाल) के अतिरिक्त वर्तमान तक गीता के गूढ़ रहस्यों को कोई उजागर नहीं कर सका। सभी ने कुछ शब्दों के अर्थ भी गलत किए हैं तथा श्लोकों का भावार्थ ही बदल दिया है। उदाहरण के लिए गीता अध्याय 18 श्लोक 66 का भावार्थ है कि गीता ज्ञान दाता ने अपने से परमेश्वर God की शरण में जाने के लिए कहा है। व्रज  vraj का अर्थ जाना है, परंतु मेरे अतिरिक्त सर्व अनुवादकों ने "व्रज" का अर्थ आना किया है आश्चर्य की बात तो यह है कि गीता अध्याय 18 के ही श्लोक 62 में स्पष्ट व ठीक अर्थ किया है कि गीता बोलने वाले काल ब्रह्म ने अपने से अन्य परम अक्षर ब्रह्म परमेश्वर  God की शरण में जाने को कहा है। वह परमेश्वर कौन who है? इसका ज्ञान हिंदुओं को नहीं है। जिस कारण से भोली जनता को भ्रमित करते रहे हैं कि श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान बोला तथा अपनी ही शरण में आने के लिए कहा है। जबकि अनेकों अध्यायों के श्लोकों  मैं गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य उत्तम पुरुष यानी पुरुषोत्तम अविनाशी परमेश्वर के विषय में स्पष्ट कहा है कि वह वही परमात्मा कहा जाता है। तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है । प्रमाण -गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में । इसके अतिरिक्त गीता अध्याय 8 के श्लोक 3 में उसे परम अक्षर ब्रह्म कहा है।परमात्मा सत्य पुरुष की महिमा कही गई है इसी अध्याय के श्लोक 8,9,10 में उस  दिव्य परमपुरुष की भक्ति करने से साधक उसी को प्राप्त होता है। इसी अध्याय आठ के श्लोक 20 21 22 में उसी अन्य अमर परमात्मा (सत्य पुरुष) की महिमा कही है जो इस पवित्र पुस्तक मैं पढ़ने को मिलेंगे आप अपने को धन्य समझेंगे।


           हिंदू धर्म गुरुओं को यह भी ज्ञान नहीं है कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके काल ब्रह्म ने कहा था। जैसे प्रेत किसी के शरीर में प्रवेश करके बोलता है । पढ़ें प्रमाण सहित अन्य सत्य गीता सार।

          "पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा?"

पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध  BAR होने जा रहा था।


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